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लगाव को सीलता


अगर प्रेम आसान होता

अस्तित्व में होता क्या

क्या

सागर सा विशाल

रेत के नीचे गीला आभास

हाॅं साहित्य के धरातल पर खड़खड़ाते पन्नों में दर्ज

लगाव को सीलता

वो भिंगता आकाश

कहो

कहो न

होता क्या

— © दामिनी नारायण सिंह
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