देखो न ये धुली सी शामगगन से लिपटा कैसे चाँदशोर नहीं आजूबाजूतारे का वो अल्पविराममंद-मंद मुस्काता चंदापर्वत जैसे हो आसानमनुहारी जग पावन साकह रहा है आज का चाँद©️?
देखो न ये धुली सी शामगगन से लिपटा कैसे चाँद
शोर नहीं आजूबाजूतारे का वो अल्पविराम
मंद-मंद मुस्काता चंदापर्वत जैसे हो आसान
मनुहारी जग पावन साकह रहा है आज का चाँद©️?