डर लगे जब जीवन से
प्रकाश पुंज की उत्पति
सुनो गर्भ कहाँ है
ये मन को तुम सुमिरन से बतला देना
जाग उठेंगी सोयी भुजाएं
आत्म स्वरूप की विविधताएं
मन जल उठेगा दीप्त वेग से
प्रज्ज्वलित आत्म अभिलाषाएं
शीतल चंदन की भांति तुम नव उष्मा से नहला देना
सुनो गर्भ कहाँ है
ये मन को तुम सुमिरन से बतला देना
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दामिनी नारायण सिंह
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