नयनों का तीर चुभा नहीं है वो सीधा दिल के पार हुआ
वो सुनहरी जुल्फों वाली थी जिस रानी से मुझको प्यार हुआ
राजकुमारी थी वो तो उसका स्वयंवर रचा गया
इक गजब तमाशा हुआ वहां मै राजा ना उसका बन सका
मैं थक हार कर बैठ गया जैसे मेरा सब कुछ छूट गया
उस अपने को अपना बनाने का सपना मेरा टूट गया
बड़े दुख से दुख अपने के बिछड़ने का सुनाया है मैंने
दर्द जब मेरे बर्दास्त से बाहर हो गया तब जाकर बताया है मैंने


