मुश्किलें कई है आसमां छुना जानता है देश मेरा

ना मुमकिन को मुमकिन कर ना जनता है देश मेरा

तकनीक की कमी थी मंगल पर जाना जानता है देश मेरा

खेल जगत में पर्चेम लहराना जनता है देश मेरा

रंग कई है मगर सरहद पर लहू बहाना जनता है देश मेरा

ठान लिया तो करना जनता है देश मेरा

विकास करना जनता है विनाश करना जनता है

प्रगति की राह पर चलना जनता है देश मेरा

धर्म कई है धर्म का सम्मान करना जनता है देश मेरा

हिंसा है मगर गांधी के असुलो पर चलाना जनता है देश मेरा

भगत कि बाजुएं रखना जनता है देश मेरा

असमानता है मगर अमीरों को साथ गरीबों को हाथ पकड़ कर

सबको साथ लेकर चलना जानता है देश मेरा

अकाल हैं कई देशों में विश्व पेट भरना जानता है देश मेरा

रोते को हंसाना जनता है देश मेरा

है देश कई इस विश्व में

भारत सा महान कोई नहीं ।


दक्षल कुमार व्यास