फ़ूल भी तो है अकेला और मै भी,
कर रहा है शोर वो भी और मै भी...
धूप में झुलसा हुआ-सा है खड़ा वो,
मुस्कुराता है वो फ़िर भी और मै भी...
लगता है ऐसे की जैसे दोनों हैं टूटे हुए हम,
जिन्दगी से लड़ रहा वो और मै भी...
बीच में हो दोनों के है एक दरिया,
खिलखिलाता है वो फ़िर भी और मै भी...
किस घुटन में जी रहा वो
किस तपन में जल रहा है,
कभी किसी के हाथों में था
अब पैरों में कुचल रहा है...
दे रहा है जिन्दगी के अनकहे से
पहलुओं पर गौर वो भी और मै भी...
