।। कवि-परिचय ।।


लिखते लिखते, कुछ ऐसा लिख जाऊं मैं ।

दुनिया की सारी मुश्किल, हल कर जाऊं मैं ।

कविता की गहराई में जाकर, डुबकियां लगाऊं मैं।

सारांश को निकालकर, जन जन तक पहुंचाऊं मैं।


।। चांदनी केसरवानी ।।