।। हौसला ।।हौसला बुलंद हो तो!इंसान पहाड़ तोड़ जाता है । खुद उठता है, और, दूसरों को उठा जाता है ।पैर तो लड़खड़ाते हैं, उसके भी मगर ।खुद को संभाल वो !दूसरों को सहारा दे जाता है ।।।। चांदनी केसरवानी ।।
।। हौसला ।।
हौसला बुलंद हो तो!इंसान पहाड़ तोड़ जाता है । खुद उठता है, और, दूसरों को उठा जाता है ।पैर तो लड़खड़ाते हैं, उसके भी मगर ।खुद को संभाल वो !दूसरों को सहारा दे जाता है ।।
।। चांदनी केसरवानी ।।