याद बनाकर तुमने
तस्वीर मुझे दी थी
ना भूलेंगे तुमको
ऐसी तहरीर हमें दी थी
क्या मंजर था उस रात का याद तुम्हें होगा
हमने सोचा तुमने
तकदीर हमें दी थी
बारिश भी हुई तूफान आया आंखों से तेरे अश्क गिरे
ना देखोगे
मुड़ कर हमको जंजीर तुम्हें दी थी
पर जो भी हुआ अच्छा हुआ कम से कम
तुम खुश तो हो
ऊपर वाले ने शायद ऐसी ही तकदीर हमें दी थी
याद बनाकर तुमने
तस्वीर मुझे दी थी
ना भूलेंगे तुमको
ऐसी तहरीर हमें दी थी
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