Poetry 1 min read 0 reads

bewafai


किस्मत यह मेरा इम्तेहान ले रही हैतड़प कर यह मुझे दर्द दे रही हैदिल से कभी भी मैंने उसे दूर नहीं कियाफिर क्यों बेवफाई का वह इलज़ाम दे रही है

Read more Earn more Learn more