मनाऊँ मैं मोहब्बत का त्योहार किस लिये,
रखु दिल मे बिछड़ने का मलाल किस लिये,
जिसे इतनी जल्दी है हमसे रूठ जाने की,
अब उन्हें मनाने की करू गुहार किस लिये
करू मैं इन मुद्दों पर बवाल किस लिए,
अब उनसे पूंछू कोई सवाल किस लिए
जिसे इतनी जल्दी हमसे रुठ जाने की
अब उन्हें मनाने की गुहार किस लिये
दिल में जगाऊँ कोई अहसास किस लिए,
अब उन्हें मैं कहु अपना खास किस लिए,
जिसे इतनी जल्दी थी हमसे रूठ जाने की
अब उस पर जताऊ मैं विश्वास किस लिए।