शून्य's image

कुछ शून्य सा कुछ कतरा जैसा..

मैं बस मैं हूँ..

और मैं नहीं हूँ तेरे जैसा ..

मैं क्यों समझाऊं उन्हें जो मुझे समझना नहीं चाहते ..

मैं क्यों बहलाऊं उन्हें जो मुझे सुनना भी नहीं चाहते

मैं जीने आया हूँ और जी रहा हूँ..

ये मेरा जीवन तुम क्यू बनाना चाहते हो..

महज़ एक तमाशा जैसा..

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