आज कुछ नही लिखना और शायद लिख भी नहीं सकूँगी| कोई कहानी नहीं कोई कविता नहीं..आज एक सोच है जिसे लिख कर शायद मेरा मन हल्का हो जाए.. एक नर्स “लीनी” या कहूँ कि एक वीरांगना के बारे में पढ़ा जो मरीज़ों का निपाह इलाज करते हुए शहीद हो गयी..और क्या नाम दूं मैं इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को..मैं नहीं जानती कि निपाह कौन सी ऐसी बीमारी है जिससे पिछले 48 घंट मे 10 से भी ज़्यादा लोगो ने अपनी जान गावा दी है ..पर वो जानती थी..

वो सिर्फ़ 31 साल की थी ..माँ भी थी वो ..कैसे इतनी हिम्मत की होगी उन्होने कि अपना स्वार्थ भूल कर औरों के लिए लड़ गयीं वो .इस बार वो मौत से लड़ रही थी..

उसे पता भी चल गया था कि अब समय आ गया है ..उसने एक चिट्ठी लिखी अपने पति के नाम.

क्या उसके मन में नहीं आया होगा की लिख दे वो सब कुछ जो भी अपने परिवार को कहना चाहती है अपने पति को कि खाना समय पर खाना रुमाल ले जाना मत भूलना.कौन क्या ख़ाता है..छोटा बेटा रोएगा तो कैसे संभालना है .दोनों बच्चे ज़िद करेंगे तो कैसे चुप करना है .खाने मे मिर्च कितनी कम ज़्यादा करनी है .किसी भी बात से ना माने तो क्या दे कर बहलाना है.स्कूल यूनिफॉर्म कब धोनी है |गर्म पानी से नहलाना है या ठंडे से. ..कितने बजे सुलाना है ..

कब उठाना है.रात को कौन सी कहानी सुनानी है ..

आज पहली बारआँखें इतनी नाम हैं ..पर ये लिखने में भी मेरा ही स्वार्थ है की मेरा मान हल्का हो जाए कैसे भी|

जहाँ मेरे जैसे लोग भी हैं जो हर छोटी बात से परेशन हो जाते हैं..वहाँ ऐसे भी लोग हैं जो अपने परिवार और बच्चों के लिए भी सब कुछ खुशी खुशी करते हैं और साथ में समाज के लिए भी..

उन्हें बहाने बनाने नही आते ..आता है तो बस सबको प्यार करना ..सबका ध्यान रखना .

आप जहाँ भी होंगी ,मैं जानती हूँ कि उस जगह को बेहतर बना ही लेंगी ..काश कि मैं एक बस जा के आपके बच्चों को देख पाती और उन्हें कह पाती की उनकी माँ बहुत बहुत बहादुर थी |