हद से बाहर निकलिए, ख्वाब पालिए..
सवालिया निशान से ऊपर, जवाब पालिए..
मुद्दतों बाद मिलती है, इंसान की जिंदगी, उखड़ना चाहते है तो उखाड़ डालिए..
बाद में उखड़ेगा न आपसे कुछ याद रखिए, खुशबू ए किरदार को और निखार डालिए...
करेगा याद ये जमाना सारा, अगर उखाड़ा कुछ अपने..
वरना करिए खुद को सुपुर्द ए खाक और राख को बिखार डालिए...
"विक्की"