वर्षा आई फूल खिले ,
सारे शलभ उनकी ओर चले ,
रंग भरी दुनिया में लेके वो अपना उमंग चले।
वर्षा आई मिट्टी महकी ,
सौंधी सौंधी खुशबू दहकी ,
लेने मिठास खुशबू की पंख फैला शिखी नाचे ।
वर्षा आई तालाब बने ,
कागज के गत्तों के नाव बने ,
होड़ लगा शोर मचा थाली में सबके पकवान सजे।
वर्षा आई याद बने ,
कोयल और पपिहा गीतकार बने ,
नभ रंगीन हुआ डाली की झर झर से गीत बने।
वर्षा आई ...... ।।
Anshuman Singh
