तुम इतना जो , खाँसें जा रहे हो ।

ये किस हवा में , जिये जा रहे हो ।।

आँखों में जलन , घुटन अलग से ।

इस बेचैनी का ज़ुल्म , सहे जा रहे हो ।।

स्वच्छ हवा भी अधिकार है मगर ।

एक और अधिकार खोते जा रहे हो ।।

 सरकारों का खेल है वो खेलेंगे ।

सरकारों से उम्मीद , जो लगा रहे हो ।।

बन गयी है अब , ज़हर जलते-जलते ।

ये परोलि जो , जलाए जा रहे हो ।।

इस हवा में तो , पहले ही धुआँ था ।

तुम क्यों धुआँ , और मिला रहे हो ।।

दिल्ली का हाल , पहले ही बुरा था ।

क्यों इसे बद से बदत्तर बना रहे हो ।।

"AAP" से तो कुछ ना होगा ।

क्यों आप , "AAP" बनते जा रहे हो ।।

स्वच्छ साँस तो दूर की बात ।

स्वच्छ भारत का सपना , देखे जा रहे हो ।।

तुम इतना जो , खाँसें जा रहे हो ।

अब साँसों की क़ीमत , चुका रहे हो ।।

#Chyaasa ...