एक दिन उनकी फ्रेंड रक्वेस्ट हमे अयी थी 

हमे नादान समझ वो फिर बात करने आयी थी 

हमसे कुछ यूं बात करती वो 

सब दर्द अपने कहती वो 

फिरसे सब हमे बता कर वो  

हमे परेशान करने आयी थी 


एक दिन उनकी फ्रेंड रिक्वेस्ट ............


- सुयश श्रीवास्तव ‘ चित्रवंशी ’