“जरा देर ठहरो राम तमन्ना यही है 

अभी जी भर के देखा नहीं है  


आओ सुनो कहानी 

तुम मेरी जुबानी 

गंगा का किनारा था , संतो के जमघटे 

जहां बाबा तुलसी दास ने पग धरे ,

बाबा ने कह दिया आज राम यहां आयेंगे 

चंदन को घिस के हम उनके माथे लगाएंगे ,


 चंदन घिसते घिसते , बेहोशी सी अयी 

और राम कहते कहते, उनको नीद थी अयी ,

इतने में राम वाहा से आकर चले गए 

चंदन को अपने माथे लगा कर चले गए 

फिर जब बाबा को होश था आया 

वो पूछने लगे सब से यहां कौन था आया 

 एक नव जवान आया था  

आके चला गया और चंदन को अपने माथे लगा कर चला गया 

इतना जो सुना बाबा को हो गया मलाल 

और फिर मन में आया ये ख्याल

लड़खड़ाते हुए दर्द सहते हुए 

बाबा ने ये कहा 

ज़रा देर ठहरो राम तमन्ना यही है 

अभी हमने जी भर के देखा नहीं है ”

- चित्रवंशी