धीरे धीरे उम्र बढ़ती ही जाएगी..
मौज मस्ती भी थकान में बदल जाएगी
अभी भी वक़्त है
कभी-कभी मिल लिया करो
यह घड़ियां लौटकर दोबारा नहीं आएगी
नज़रें भी आपस में चार नहीं होंगी
चश्मो की दीवार बीच में आ जाएगी
अभी भी वक़्त है मिल लिया करो
यह घड़ियां लौटकर दोबारा नहीं आएगी
अभी तो यार साथ है हाथों में हाथ है
बाद में तो हाथों में बस छड़ी नज़र आएगी
बचपन तो भाग गया
जवानी भी गुज़र जाएगी.
जी लो अपनी ज़िंदगी यह लौट कर ना आएगी
धीरे धीरे उम्र बस बढ़ती ही जाएगी
मौज मस्ती भी थकान में बदल जाएगी..

