बेटी तेरी सखियां बन कर
देखो तुमको खुब सजाई
मांग भरी मैंने प्रियतम का
बिंदिया माथे को चमकाई
कानों में बाली है प्यारी
मंगल-सूत्र गले का हार
खुब सजाया खुब संवार
बोल रहा सब तेरा प्यार
पर तुम मौन जरा कुछ बोलो
सभी दिशाएं भी चुपचाप
आंखों से बस खारा पानी
विस्मित बहता अपने आप
यह अंतिम श्रृंगार प्रिये का
इंद्रधनुष चादर फैलाए
वाणी तेरी मिश्री घोले
पर अब गुमसुम बिना बताए
देख यहां चित्कार रुदन का
तुम तो द्रवित जरा हो जाती
आज मौन तुम हम-सब बेसुध
अनजाना बन हमें रुलाती
प्रियतम मैं अपराधी तेरा
तुमने तो हर बार पुकारा
सुना नहीं मैं निर्मम बन कर
लुटा दिया जो सबसे प्यारा
अब तुम दूर क्षितीज के पथ पर
जहां न कोई सांझ सबेरा
निष्ठुर नियति ने समझाया
तुम तो जीवन साथी मेरा।

