वो मां के लाल शेर थे,
दहाड़ से हिला गगन,
असंख्य वेदनाओं संग,
निभा गए वचन।
उन्हें नमन ---------
स्वयं जिए स्वदेश हित,
सभी सुखों को भूल कर,
समस्त शक्ति से लड़ें,
तब कहीं मिला वतन,
उन्हें नमन ---------
मातु पितु,सखा,स्वजन,
थे मातृ भूमि और वतन,
असंख्य वे सपूत जन,
उन्हें नमन -----------

