तेरी आँखें हैं मधुशाला,
तेरे होठ है सुर्ख गुलाबी..
इसको एक प्यारा सा कमल कहूँ।
तू मेरी चाहत तू ही मोहब्बत
तू मेरी धड़कन तू मेरी हसरत
तुझको मैं उल्फ़त कहूँ।
तेरी आँखें हैं मधुशाला
इस पर शेर लिखूँ या ग़ज़ल कहूँ।।
तू मस्तानी है मौजों की रवानी है
कह के भी ना कह पाऊं तू ऐसी कहानी है
तू मेरी खुशी है तू मेरी ज़िंदगी
तू मेरी आरज़ू तू मेरी ज़ुस्तज़ू
तुझको मैं उल्फ़त कहूँ
तेरी आँखें हैं मधुशाला।
इस पर शेर लिखूँ या ग़ज़ल कहूँ।।
तू सर्दी की धूप तू गर्मी की शाम
देख कर छाए नशा तू ऐसी है ज़ाम
तू मेरी साँसों में तू मेरी बातों में
तू मेरी यादों में तू मुलाक़ातों में
तुझको मैं क़िस्मत कहूँ
तेरी आँखें हैं मधुशाला
इस पर शेरे लिखूँ या ग़ज़ल कहूँ।।
