हर रिश्ते का नाम यहाँ पर
हर रिश्ते का काम यहाँ पर
काश यदि कर्तव्य निभाते
शांति प्रेम जीवन में आते ।
पर रिश्ते कुछ अर्थ खो रहे
कांटें बन कर दर्द हो रहे
सब अपनी आपाधापी में
हंसी छिपाए स्वयं रो रहे ।
त्याग समर्पण की वेदी पर
रिश्तों की हैं सांसें चलती,
टूट न जाए इसकी डोरी
अरमाँ सबके अंदर सजती ।
अपने ही दिल से कुछ पूछें
रिश्तों की है क्या गर्माहट,
जब तक सांसों में धड़कन है
तब तक रिश्ते देते आहट..

