रात रात जगती थी सबके लिए,
कभी नहीं थकती थी,हमारे लिए,
अम्मा की याद आई,आंखों में बाढ़ लाई।
उस दिन गमगीन सब थे,
जिससे भी पूछा जवाब यही पाया,
अम्मा है थक गई,अम्मा है सो गई,
आंखे सब की भिगो गई।
पावस में पुरवा सी बयार थी,
जब भी हम थक गए,वह साहस अपार थी,
दुखी कभी देखा नहीं प्यार ही प्यार थी,
अम्मा की याद आई ---
सबको दुलारती थी बांहों में अपनी जो,
आज उनको कांधे पर क्यों लिए जा रहे?
सबको हंसाती थी, बातों से अपनी,
उनके साथ लोग क्यों गम का गीत गा रहे,
अम्मा की याद आई ----
आग के बीच अम्मा क्यों कर है सो रही,
बापू ने बताया अम्मा राम की हो गई,
मैं था अबोध, अम्मा जादू की छड़ी थी,
वहीं मेरी अम्मा घर राम के गई थी,
अम्मा की याद आई ----
आज मैं वयस्क हूं और सब समझता हूं,
लेकिन मेरा अम्मा सा,जग में कोई नहीं,
बुद्धि,ज्ञान सभी कुछ शून्य हो जाता है,
अम्मा की यादों का बवंडर जब आता है
अम्मा की याद आई ----
