प्रिए तुम परिहास में भी,

दूर ना जाना कभी..

दो बदन पर सांसें साझा,

तेरा आधा मेरा आधा..


मैं भ्रमर मकरंद है तू,

उपासक मैं, आनंद है तू,

तू मेरी आराध्य प्रेयसि,

साध मेरी पूर्ण कर दे..


आस में विश्वास हो तो,

हर जनम में साथ देना,

मैं निरा उन्मुक्त प्यासा,

"मय" पिला तू तृप्त करदे..


भावना से भरे उर को,

अधूरे इस विलग तन को,

निरखते मम विकल मन को,

निज मिलन से पूर्ण कर दे..