बचपन में जो पिंजरा लगा बड़े होकर पता चला..

आजादी की राह में वो है एक उजाला 

वक्त ने समझा दिया कि पढ़ाई है

सपनो की आज़ादी का दीया

शब्द दिए हैं इसने हमे बातो को बताने के लिए

राह दी है इसने हमे सपनो तक जाने के लिए

अब वक्त आ गया है इस पिंजरे से आज़ाद होने का और आज़ादी ने ही हमे रुला दिया..