चंदन मन, किसलय सा तन,

महक गया मेरा जीवन,

तुझ को पाकर खिला खिला सा,

मन का प्रांगण है वृंदावन।

फूल जैसी मुस्कान तुम्हारी..


शतदल सा कोमल तन मन,

चपल चकोरी चितवन तेरी,

मैं तो हार गया निज जीवन।


बरखा सी बहार बनकर तू,

नव रस का संचार कर रही,

मुक्त भाव से सुमुखि मुझे तू,

सहज भाव से प्यार कर रही।


पंख नहीं पर उड़ता जाता,

तेरा मन मुझ संग मिल जाता,

प्यार हमारा नया नहीं है,

जन्मांतर का अपना नाता..