मेरी चित्रा मोहताज नहीं किसी गुलाब की,
वो खुद बागवान है इस पूरे कायनात की..
फूल गुलाब का लाखों में हजारों में
एक चेहरा जनाब का..
हाँ झोंके सुरूर के,
ऐसी तारीफें करना सीखे कोई हुजूर से..
गोरे गोरे हाथों में मेहंदी महकती है,
फूल सी कलाई में चूड़ी खनकती है..
चूड़ी खनकती है..

