फिजा की मदहोसियों का,

राज हो तुम..

चहकते दिल की मेरे,

आवाज हो तुम..

जिस्म क्या है,जान क्या,

सभी की सरताज हो तुम..

मैं निरा निर्मम जगत में,

खो गया था..

बे वजह सबकुछ लुटाया,

फिर मुझे जीना सिखाया..

साथ यह बरसात यह खुशियां,

कभी भी कम न हों..

हर कहीं रौनक तेरे चेहरे कि,

बिल्कुल कम न हो..

मैं मेरा, मुझ को नहीं,

अपना हो सबकुछ..

सारे गम तेरे हमारे,

हर खुशी मेरी हो तेरी..