फूलों के जैसा चेहरा है उसका

आँखों में वो जाम है।

प्याले में नाचे तस्वीर उसकी

दुनिया का क्या काम है।


छोड़ी वो बचपन ओढ़ी जवानी

रंगीन कितनी ये शाम है।

पिलाई है जब से उतरी नहीं

मयखाने का क्या काम है।


अंगूरी- गुच्छा वो रस से भरा

सारा बदन ही जाम है।

कदम चूमती फूलों की कलियाँ

सर उसके कितना इल्जाम है।


बारिश की बूँदों में छाई नशा

मेघों की डोली का क्या काम है।

बैठी है दिल की डोली में कब से

मेरा दिल कब का नीलाम है।


मदहोशी छाई है चारों तरफ

उस बाली उमर को सलाम है।

वर्षों से प्यासी उसकी भी आँखें

आखिर क्यों मयकश बदनाम है।


शोला भी है वो शबनम भी है।

साकी का इसमें क्या काम है।

बदन चूमती हैं लोगों की नजरें

बेलगाम मौसम का अंजाम है।


दे-दे तू मौला जो भी जो चाहे

मुझको तो उससे ही काम है।

हीरे वो मोती वो चाँद -सितारे

न मेरा मकसद न वो मकाम है।


कतरो न खुद का पर पीनेवालों

कुदरत का चहुँ ओर इंतजाम है।

जहरीली शराब को न छूना कभी

सृष्टि के मालिक को प्रणाम है।