मैं रेत का दरिया हूँ तू बहता हुआ पानी हैं..
हम दोनों की मिलती जुलती कहानी है..
तू शोलो को ठंडा करती है
मेरा दिल शोलो की रवानी है
मैं रेत का दरिया..
जब क़भी तू मिलती है मुझसे अनजाने में
मैं थक सा जाता हूँ खुद को बचाने में
होता है जिक्र मेरा भी जब कोई कहता है ठहरा हुवा पानी है
मै रेत का दरिया..
आ अब हम दोनों एक दूजे के हो जाये
तू मुझमे मिल जाये हम तुझमे खो जाए
फिर दोनों कहेंगे ये तो मौजो की रवानी है
मैं रेत का दरिया..
जब चढ़ जाएगी अपनी मोहब्बत परवान
ऐ राज हो जाएगी बस्ती बस्ती जब बिरान
एक दूजे से लोग कहेंगे ये दो दिल की कहानी है
मैं रेत का दरिया हूँ तू बहता हुआ पानी हैं..
हम दोनों की मिलती जुलती कहानी है..

