मैं..
शब्द बहुत ही छोटा है पर होता बहुत भारी है
इस मैं के कारण ही तो
उलझी दुनिया सारी है
नश्वर होकर भी मैं हूँ
सब मैंने ही तो किया है
मैं न करता तो न होता
अहम का दूसरा नाम मैं
ज़रा सी प्रशंसा हो तो मैंकोई उपलब्धि हो तो मैं
कोई पद मिल जाए तो मैं
अंदर से खुद ही प्रकट
बहुत निम्न होना पड़ेगाबहुत बड़ा होना पड़ेगा
बहुत सरल होना पड़ेगामृदुभाषी होना पड़ेगा तुझे
खुद को मिटाना होगा
सर को झुकाना होगा
तभी मैं का जाना होगा
तभी मैं का जाना होगा।
