बिछुड़ना शब्द जेहन में आते ही

कलेजा मुँह को आ जाता है

तुरन्त दिल धड़ककर कहता कि

नहीं ऐसा कभी नहीं हो सकता है

कोई नहीं चाहता है जुदाई

यदि वश उसका अपना चलता है

लेकिन कभी सच ही

वो काला दिन आ ही पहुँचता है

तब हालत उस वक्त की

मत पूछो बयां करना बड़ा मुश्किल है

उसका लाख कोशिशों के बाद भी

अंदाजा लगाना सम्भव नहीं है

उसका दर्द तो जानता है वही

जिसका दिल चिर टुकड़ा अलग होता है

उसे चाहकर भी रोना आता नहीं

ना दिल को एकपल चैन आता है

एक-एक पल गुजरना भी

साल जैसे लगने लगता है

ऐसा लगता है कि

अब मिलन दुबारा नामुमकिन है

जीवन बदतर मौत से भी

जुदाई के बाद हो जाता है

अलविदा दिल को सच ही

निचोड़कर रख देता है