ये दो सज्जन खड़े हैं
अंगूठी में हीरे जडे़ हैं
जिम्मेदारी के नाम पर
दोनों एक दूसरे से बड़े हैं
मामला कितना विकट
मां को कौन रखे है संकट
तीसरे व्यक्ति की सलाह
मां ही दूर करेगी झंझट
मां का यह सुनना था
यानि एक बेटा चुनना था
बोली दोनों प्राण हो मेरे
कोई राज नहीं जो खुलना था
पर भोली मां यह नहीं जाने
कोई बेटा नहीं आया तुझे मनाने
ये दोनों साथ ही तो आये हैं
तुझे वृद्धाश्रम तक ले जाने
दोनों का संकट मां ने दूर करा
बोली गांव का घर खाली पड़ा
मैं वहां चली जाती हूं
आते रहना तुम दोनों वहां
कितना बड़ा बोझ था किसी पर
मां ने नहीं झुकने दिया बच्चों का सर
कोई भी जमाना चाहे आ जाये
मां का हाथ रहेगा बच्चों के सर पर
