बेटी तुम मेरी छाया हो

सारी खुशियाँ तुम्हें लुटाऊँ

दुख में सुख में दिल की बातें

मेरा दर्पण तुम्हें दिखाऊँ 

तुमसे महका यह घर आँगन

भोली सी मुस्कान बिखेरे

विदा हुई जब दुल्हन बन कर

आंखें तकती सांझ सबेरे 

तुम मेरी हो राजदुलारी

तुमसे सजता दो फुलवारी

सबके मन की भाषा पढ़ कर

तुम बिखेरतीं खुशियाँ सारी 

बेटी तुम जीवन की आशा

त्याग समर्पण की परिभाषा

माँ की ममता तुम्हें पुकारे

दूर करो जो घिरी निराशा।