दिल के समुंदर से अश्कों के

मोती को यूं ही न खोने देना

संगदिल जमाने के लिए

खुद को रोने न देना

जज्बातों को स्वार्थी फितरतों

की जरूरत नहीं होती

अब कामयाबी से बढ़ के

कोई चीज खूबसूरत नही होती

ऐ दिल निकल जा इन बेबसी की राहों से

हैसियत में कैद इन कंक्रीट की दीवारों से

खुले आसमां की सादगी में उड़ता हुआ तेरा मन

नही स्वीकार करता है ये दिखावे के बंधन

चल अपनी धुन में पुष्पक का होके

कोई नहीं है जो तेरी मस्त दीवानगी रोके

अपनी इस सादगी को खोने न देना

संगदिल जमाने के लिए

खुद को रोने न देना..