भयभीत हो के व्यर्थ में  निष्प्राण जीवन मत बिता  याद रख बिन साहस के   हैं जीवन एक मृत चिता  भर अदम्य  साहस  पक्षी ऊँचा है उड़ा हाथ पर यु हाथ धर  कोई कभी ना आगे बढ़ा साहस के ही ज़ोर पर  सिकंदर ने सब कुछ जीता  याद रख बिन साहस के  है जीवन एक मृत चिता  एक नन्हा सा अंकुर भी  निकला देख धरा को फाड़ के  तेरे भीतर का जो डर है  रख देगा तेरी दुनिया उजाड़ के  साहस के ही ज़ोर पर  राम छुड़ा लाए थे सीता  याद रख बिन साहस के  है जीवन एक मृत चिता