तुम चाहती थी
जानना सनम
कौन है - कहाँ
मेरा पहला प्यार
वो ही ज़मीं है
वही आसमां
पला उसके आँचल में
वो है मेरी माँ
तुम चाहतीं थी .......
ऊँगली पकड़ कर
चलना सिखाया
हालातो से लड़कर
सम्भलना सिखाया
सुन ले ओ प्रियतम
तुम हो मेरी जान
पर मेरी माँ से ही
है मेरी पहचान
तुम चाहती थी जानना सनम ......
जाग के काटी उसने
जाने कितनी रातें
पढ़ती नेनों से
मन की सारी बातें
ओ दिलरुबा तू ही
मन्नत है मेरी
क़दमों में माँ के ही
जन्नत है मेरी ।
तुम चाहती थी जानना सनम .....
तरस रहा उसकी
सुनने को लोरी
मेरी माँ लगे मुझको
चन्दा से गोरी
तुम मिल गए हर
ख़्वाहिश है पूरी
माँ के बिना मेरी
दुनिया अधूरी
तुम चाहती थी जानना सनम .....