आज सुबह से घर में शांति का माहौल है,

यह भी घर में क्यों है सब के बीच यह सवाल है,

घर में अलमारी एक खाली हुई हैं,

बहन को भैया के रूम की चाबी मिल गयी हैं,

घर में सबको महसूस हुई हैं किसीकी कमी ,

सबके चेहरे हसते है,पर दिल में है नमी,

आज पिताजी को किसीको मारने का मन नही,

मम्मी को भी आज डाँटने को कोई प्रसंग नही,

दादाजी ने किस्से बनाना छोड़ दिया है,

दादीजी ने कहानी सुनाना छोड़ दिया है,क्यों कि,,,सबके चहिते-लाडले ने आज घर छोड़ दिया है,,

वो पहोच गया है दील्ली,दिल में लाखों अरमान लिए और आंखों में एक बड़ा सा ख्वाब देखे ,,,

अपनी किस्मत और मेहनत की दौड़ में ,सबसे आगे कोन है देखे,,,अपने बड़े-बड़े शौख और दोस्तो की कुर्बानी उसे लगती हैं छोटी,,,

मुखर्जीनगर और नेहरू विलास के अलमारी जितने कमरे और किताबे है मोटी-मोटी,,,

आ तो गया आसानी से यहां, पर यहाँ तो सबकी मेरे जैसी ही लाचारी है,,,

मुझे लगता था कि सिर्फ मैं ही हूँ ऐसा,पर यहा तो लाखों को यही बीमारी है,,,

                                                    To be continued,,,