मॉं की दास्तां's image
99K

मॉं की दास्तां


सब का ग़म में कागज़ पे लिखता हूँ आज सोचा की माँ
तेरी दास्ताँ भी बयान कर दूँ

वैसे तो मेरी हर साँस तेरी रहमतों की मोहताज़ है
मगर मैं आज सबके सामने अपनी जिन्दगी मां के नाम कर दूँ

मैंने अपनी आँखों के सामने जब-जब तुझे बिलखता देखा है माँ तब-तब

अपने दिल को धड़कनें से रोका है
मुझे तो याद नहीं वो मंज़र बचपन का

लेकिन लोगो से में तेरी दांस्ता सुनता आया हूँ, तुझे तकलीफों के बदले लाखों
खुशियां दूं मैं
 माँ में ऐसे लाखो सपने आजतक बुनता आया हूँ

 मैंने सुना है तू
अपने एक बेटे को खो कर टूट सी गयी थी| तब कितनी मन्नतो के बाद ईश्वर ने
मुझे भेजकर तेरी गोद फिर से हरी की थी मां

खुशी से तू फूलसिमटी नहीं थी कहते है,
बार-बार मेरा माथा चूमती थी

सुना है उस वक्त तूने मेरे लिए खाना पीना छोड़
दिया था
मुझे तूने सिने से लगा कर जहाँन से मुह मोड़ लिया था

टूटी-फूटी छतों
पर से जब रातो को पानी टपक था
Read More! Earn More! Learn More!