अपने में रहती हूं, अपना मै करती हूं;
लेकिन तुम्हारे लिए भी, हां! मै हूं।
खुद से प्यार करती हूं, खुद ही को संभालती हूं;
पर खुद से ज़्यादा तुम्हे संभालने के लिए, हां! मै हूं।
मेरी कुछ आदते अच्छी है, कुछ है बुरी भी;
पर तुम्हारी आदतो के लिए, हां! मै हूं।
मेरे माता-पिता से प्यार है बहुत, उनकी चिंता भी करती हूं;
पर तुम्हारे घरवालों के लिए भी, हां! मै हूं।
खुद को मै सजाती हूं, संवारती भी हूं खुद को ही;
पर तुम्हारे घर को सजाने के लिए भी, हां! मै हूं।
मुझे शोंक है लिखने का, मुझे शाेंक है बोलने का;
पर तुम्हारी भी सुनने के लिए, हां! मै हूं।
मुझे बस पसंद है, खुद ही से बाते करना;
पर फिर भी तुमसे बाते करने के लिए, हां! मै हूं।
घूमना है मुझे भी पसंद, ख्वाहिशें है मेरी भी बहुत;
पर तुम्हारी फरमाइशों को पूरा करने के लिए, हां! मै हूं।
सब कर जाओगे तुम मेरे पीछे, यकीन है मेरा;
पर तुम्हारे लिए सब छोड़ने को तैयार, हां! मै हूं।
मेरा भी अस्तित्व है, मेरे है कुछ सपने भी;
पर तुम्हारी पहचान से जीने को तैयार, हां! मै हूं।
प्रकृति की ओट में खुल कर जीना है मुझे;
पर तुम्हारे लिए कैद में रहने को तैयार, हां! मै हूं।
मेरी बाते समझे कोई, अपना मुझे बना ले;
पर तुम्हारी बाते बिना कहे समझने के लिए, हां! मै हूं।।
-चारु जैन।।
