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अर्ज किया है ...

बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था


हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा ...


Nishant Chandravanshi