(1) तेरे खामोश से चेहरे से मैं कुछ कह नही पाया बहुत सोचा बहुत समझा पर आगे बढ नही पाया मेरी आंखों ने तेरी आंखों से क्या कहा था तब ना तुम समझ पाये ना मैं समझ पाया।।।।। (२) तेरे दीवानेपन की लौ अभी तक जला रहे है हम तेरे भोलेपन को दिल में अभी तक सजा रहे है हम बड़े आये ऋतुराज इस दिल के मौसम में पर तेरे लिखें चंद लफ्जों को अभी तक गांव रहे है हम