प्यार इश्क मोहब्बत इसका कोई सार नहीं बाबा, ये बस दिल के समझौते है प्यार नही बाबा! इन आधे अधूरे शब्दों में कोई जज्बात नही बाबा, हम भी एक हरजाई को दिल दे बैठे थे पर रहे इंसान  नहीं बाबा ! इस पागलपन की जद में सारी दुनिया छुट गया, बस नाम तुम्हारा याद रहा बाकी सब मैं भूल गया! गर अब भी लौ जलती  है इस आवारेपन की, तो बस इतना कह दें मैं सारे शिकवे भूल गया !! तेरे आंखों की नमी को चुकता कौन करेगा, टूटे हुऐ दिल से फिर मोहब्बत कौन करेगा! इन आंखों की जुगलबंदी में हर बार तुम्हारा चेहरा होता है, गर तूने मरने की बात कही तो भला इस पागलपन पर कौन मरेगा !! ना हीर रांझा ना गुलजार हुआ करते थे, कालेज दिनों में हम देवदास हुआ करते थे! जिनके पलकों के नीचे सोने की  चाहत थी हमको , उन्हीं से रुसवा हर बार हुआ करते थे !! मेरे जीने मरने में बस एहसास तुम्हारा है, मेरे हर इक सांसों में बस साथ तुम्हारा है ! गर मैं छोड़ गया अपनी सांसें इस पत्थर की दुनिया में, तो पागल लोग कहेंगे बस हाथ तुम्हारा है !!