अब भी याद तुम्हे मै आता हूं क्या रोज बहानो से तुम्हे झुठलाता   हूं क्या शहर के उन शोर शराबो सख्त हवाओं मे कभी कभार मंदिर मे दिख जाता हूं क्या मेरी यादों मे जब तुम आधी रात को रोती हो तो अब भी तुमको चुप करवाता हु क्या नये शहर मे ना जीने कितने नये लोग मिले है पर मै कालेज बस मे तेरे संग आता जाता हूं क्या जब घर के कामो मे थक जाती हो मेरी लाडो तो संगदिल सगंयारा तुमको कह जाता हूं क्या अब भी याद तुम्हे मै आता हूं क्या