एक संदेश अपनी भावनाओं के द्वारा ......
बेबस और लाचार जिंदगी
मै ब्रजेश चंद्रा आजाद भारत के बेबस और लाचार भरे जिंदगी के बारें मे कुछ लिखने जा रहा हूँ। क्षमा चाहूंगा यदि लिखने मे कुछ त्रुटि हो जाये तो माफ़ करना।आज अजादी के 72 साल बीत चुके है लेकिन कुछ ज्यादा नही बदला है।बदला है तो लोगों मे गंदी धारणा, नशा और क्रूरता जो कि समाज को खोखला करने के लिए काफी है। समाज मे जलन और एक-दूसरे से दुरी बनाये रखने की भावना बड़ती जा रही है,जो समाज मे रह रहे लोगों के लिए सही नहीं है। हमे समाज मे जाति विशेष का न ख्याल करके आपसी तालमेल अच्छा रखें तो हद तक समस्या का समाधान हो सकता है। किसी भी सुंदर जिंदगी को समाज बना सकता हैं।अक्सर आप अपने आस पास देखें होंगे कि जिस मासूम बच्चों के हाथ में कलम, खेलने का समान होना चाहिये उस मासूम के हाथ मे कही कचड़े की थैली तो कही तपती धुप मे तामसा दिखाते हुए । यह सब बेबसी और लाचार जिंदगी का ही उदाहरण है। सरकार अजादी से लेकर अबतक कोई ठोस क़दम नहीं ले पाई है जो की उनकी बदहाली हालत को बदल सकें।कई होनहार बचपन का गरीबी की गोद में समा जाने के कारण उनका हर एक ख्वाब पर पानी फिर जाता है। आपने अक्सर यह भी सुना होगा की कोई होनहार छात्र अपनी फीस नही देने के कारण आगे का सफर तय नही कर पाया। क्या गरीब होना अभिसाप है ? । यदि नहीं तो ऐसा क्यों, उन होनहार छात्रों का हर एक ख्वाइश गरीबी के कारण टूट जाते हैं।यदि कोई असलील कार्यक्रम कही हो रहा हो, उसमे हम लाखों रुपया रातों रात लूटा देते है। दूसरी तरफ गरीबी के कारण बीच मे पढ़ाई छोड़ देने वाले बच्चे की मदद करने की बात की जाये तो हमारी आँख बंद हो जाती है। कोई गरीब अपने बेटी की शादी के लिए आत्महत्या कर रहे है। कहीं उनके घर उजड़ रहे है।क्या वाकई मे आजाद भारत के आजाद जीवन वह सभी जिंदगी भी जी रहे है, जिनके पास सपना के अलावा कुछ भी नहीं है। यदि हाँ तो यह कहना गलत होगा ,क्योंकि आजकल समाज की दशा दिन प्रतिदिन और बदतर होते जा रही हैं। जहाँ हमे काफी- कुछ सिखने को मिलते थे, वहाँ आज के समय मे सिखने को कम दिखने को ज्यादा मिल रहे है:-एक गंदी सोच, हीन भावना, नशा और क्रूरता जो समाज को विपरीत दिशा में ले जा रही है। हमें समाज में फैले कुरीतियो को दूर कर एक अच्छा समाज बनाने मे सहयोग करना होगा।एक दूसरे का मदद करना होगा,समाज मे गरीब-अमीर की खाई को भरना होगा।जात-पात के भेदभाव को दूर करना होगा।तभी हम एक दूसरे का सहयोग कर सकेंगे, जब हमारे दिल में कोई भेद भाव नहीं होगा। हम सभी को एक प्रयास करना चाहिए कि जो बच्चे पढ़ाई कर रहे है और उसे आर्थिक समस्या के कारण पढ़ाई मे परेशानी आ रही है तो हमें उनका मदद जरूर करना चाहिए,आपकी मदद से वह बच्चे आगे की पढ़ाई जारी रख पायेगे।आपके द्वारा किया गया एक छोटी सी मदद उस गरीब को भी वास्तव में अजादी दिला सकता हैं !मुझे दुख है की देश की 40%आबादी गरीबी और बेबसी से घिरी जिंदगी जी रहें है, न उसके पास खाने का खाना न ही पहनने के कपडे,हम सभी का एक प्रयास उन बेबस और लाचार जिंदगी को सुंदर बना सकता हैं! यह तभी संभव हो पाऐगा जब समाज के शिक्षित और संपन्न वर्ग के लोग आगे आयेगे।मैं आप सभी से अनुरोध करूँगा की बेबसी और लाचार जिंदगी मे भी एक अच्छे शिक्षक, इंजीनियर, डॉक्टर,डॉ०कलाम साहब, सुभाष चंद्र बोस जी ,वीर भगत सिंह जी बनने के कबिलियत है। आपके द्वारा किया गया मदद उनके अपने हर मंजिल को असान बना सकती हैं। हमें अमीर-गरीब के भेदभाव को मिटाकर एक अच्छे समाज बनाना चाहिए। हम गरीबी को जड़ से हटा नहीं सकते ,लेकिन सहयोग हटानें मे जरूर कर सकते है ।हम सभी का एक कर्त्तव्य होना चाहिए । कहा जाता है कि हमारे रग-रग मे दयालु और सेवा की भावना बसी है, जो यह हमारे पूर्वज के द्वारा दिये गए उपहार है। हमें इस उपहार को मदद कर के दिखाने की जरूरत है। तभी तो भारतीय संस्कृति में एक श्लोक हैं:-सेवा परमो धर्मः (सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है) हमें जरूरत पडने पर मदद करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
ब्रजेश चंद्रा
(भारतीय सेना)


