शाम ढले यादों के आईने में कुछ चेहरे दिखे
कुछ धुंधले कुछ अपने कुछ बेगाने दिखे
धुंआ धुंआ है बस्ती कौन किसको पहचाने
राख के ढ़ेर में दबे कुछ चेहरे जाने पहचाने दिखे ।।


शाम ढले यादों के आईने में कुछ चेहरे दिखे
कुछ धुंधले कुछ अपने कुछ बेगाने दिखे
धुंआ धुंआ है बस्ती कौन किसको पहचाने
राख के ढ़ेर में दबे कुछ चेहरे जाने पहचाने दिखे ।।