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यादें


शाम ढले यादों के आईने में कुछ चेहरे दिखेकुछ धुंधले कुछ अपने कुछ बेगाने दिखे

धुंआ धुंआ है बस्ती कौन किसको पहचानेराख के ढ़ेर में दबे कुछ चेहरे जाने पहचाने दिखे ।।

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