रोज होते ये रात दिन वक्त पे होते रहे  

चांद सितारे निकलने थे सो निकलने लगे 


जो रोये थे नियती कह अब हँसने लगे

काम रूके थे कर्तव्य कह सब होने लगे 


ऋतु बदली मौसम बदला सब तुम्हें भूलने लगे 

शायद मैं भी ...

एक तेरे न होने से कुछ भी तो नहीं बदला .!!