तुम्हें ढूढ़ना जो चाहूं तो कहीं मिलोगे क्या 

दिखती नहींं है तुम्हें क़यामत मिल कर करोगे क्या 


सज़दा अक़ीदत विश्वास मन्नत कुछ तो ख्याल करो 

जीवन ही नहीं बचेगा तो तुम भी रह कर करोगे क्या  ??