दुआ भी तुम,अकीदत भी तुम,इबादत भी तुम 

           तुमसे ही मेरे इश्क की रानाई है


यूं ही नहीं चाहता तुम्हें रब से बढ़कर 

   तुम से ही जीवन में खुशियाँ आयीं हैं  ।।